Friday, July 9, 2010

साया

यादों के सहारे जीते थे हम
तुम्हारी ही खयालो में हस्ते थे हम !
बिखरे थे कितने दर्द भरे वोह दास्तान
फिर भी अंधेरे में साया ढूंडते थे हम !!

---एस एन रमेशा -------